जब न्यूज़ भविष्य बेचने लगे,
और वर्तमान अनदेखा रह जाए...
ज्योतिष, राशिफल और भविष्यवाणियाँ — इनका समाज को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलता।
❌ न रोजगार बढ़ता है
❌ न महँगाई घटती है
❌ न शिक्षा सुधरती है
❌ और न ही स्वास्थ्य व्यवस्था बेहतर होती है
फिर भी आज कई न्यूज़ चैनल घंटों का समय ग्रह-नक्षत्र, भाग्य और कथित भविष्य बताने में खर्च कर रहे हैं।
यह ज्ञान नहीं है...
यह डर पैदा करने का माध्यम है।
यह लोगों को सोचने से रोकता है।
और असली मुद्दों से ध्यान भटकाता है।
जब युवा बेरोज़गार हों… जब परिवार महँगाई के बोझ तले दबे हों… जब इलाज एक कर्ज़ बन जाए… और शिक्षा आम इंसान की पहुँच से दूर होती जाए…
तब न्यूज़ चैनलों का राशिफल दिखाना
सिर्फ मनोरंजन नहीं,
बल्कि जिम्मेदारियों से बच निकलना लगता है।
मीडिया का काम भविष्य का डर बेचना नहीं, बल्कि वर्तमान की सच्चाई दिखाना चाहिए।
लेकिन जब सवालों की जगह “कल क्या होगा” जैसी कहानियाँ दिखाई जाने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि उद्देश्य सूचना देना नहीं, बल्कि जनता का ध्यान भटकाना है।
अब सवाल बिल्कुल साफ़ है —
क्या न्यूज़ चैनल
समाज की समस्याएँ दिखाना चाहते हैं,
या ब्रह्माण्ड का व्यापार करना?
क्योंकि भविष्य तो बाद में आएगा…
लेकिन वर्तमान जवाब मांग रहा है — अभी।
✍️ कलम की आवाज़
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