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बड़े बाबू संस्कृति” में फंसी जनता | बिजली दफ्तरों की सच्चाई

बड़े बाबू के पास जाइए…

आखिर आम आदमी कब तक यूँ ही भटकता रहेगा?

उत्तर प्रदेश के कई बिजली दफ्तरों की हालत आज भी ऐसी है,
जैसे समय बदल गया हो…
लेकिन सोच अब भी वहीं अटकी हो।

सरकार डिजिटल व्यवस्था की बात करती है।
ऑनलाइन शिकायत, त्वरित समाधान और जनता की सुविधा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
लेकिन जमीन पर सच्चाई कुछ और ही दिखाई देती है।

एक आम आदमी जब बिजली की समस्या लेकर दफ्तर पहुंचता है,
तो उसे समाधान नहीं मिलता…
उसे सिर्फ़ एक टेबल से दूसरी टेबल तक घुमाया जाता है।

यह काम हमारे पास नहीं है…


बड़े बाबू के पास जाइए…


अभी सिस्टम बंद है…

और आखिर में वही आदमी,
जो सुबह उम्मीद लेकर आया था,
शाम तक थककर वापस लौट जाता है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि
आज शिकायत करना आसान हो गया है,
लेकिन शिकायत का समाधान मिलना मुश्किल।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज होती है।
नंबर भी मिल जाता है।
मैसेज भी आ जाता है।
लेकिन कई बार समस्या वहीं की वहीं रहती है।

कागजों में शिकायत “निस्तारित” हो जाती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत में कुछ भी नहीं बदलता।

सोचिए उस व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या होती होगी,
जो लगातार तीन महीने से अपनी समस्या लेकर संघर्ष कर रहा हो।

हर बार नई शिकायत।
हर बार नया इंतज़ार।
हर बार नई उम्मीद।

लेकिन अंत में मिलता क्या है?

Complaint Closed.

बिना काम हुए।
बिना सुनवाई हुए।
बिना समाधान हुए।

यह सिर्फ लापरवाही नहीं है।
यह आम आदमी के धैर्य का मज़ाक है।

सरकारी दफ्तर जनता की सेवा के लिए बनाए गए थे।
लेकिन कई जगहों पर हालात ऐसे हैं,
जैसे जनता सेवा लेने नहीं,
बल्कि किसी एहसान की भीख मांगने आई हो।

फाइलों से ज्यादा अहंकार दिखाई देता है।

“अगर ज्यादा बोल दिया,
तो अगली बार मेरा काम और रोक दिया जाएगा…”

आज जरूरत सिर्फ बिजली सुधारने की नहीं है।
जरूरत है सोच सुधारने की।
जरूरत है उस पुरानी “बड़े बाबू संस्कृति” को खत्म करने की,
जहाँ जनता को इंसान नहीं,
सिर्फ एक फाइल नंबर समझा जाता है।

जनता सुविधा मांगती है।
सम्मान मांगती है।
जवाब मांगती है।
एहसान नहीं।

जिस दिन दफ्तरों में कुर्सी से ज्यादा इंसानियत की कीमत होगी,
उसी दिन व्यवस्था सच में बदलती दिखाई देगी।


जय भीम! ✊

Kalam Ki Awaaz 

#UPPCL #BijliVibhag #UttarPradesh #SystemChange #जयभीम


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