कहानी: बर्दाश्त की हदें एक साधारण शुरुआत रीना का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। माता-पिता मेहनत-मज़दूरी करके घर चलाते थे। घर में तंगी थी, लेकिन रीना ने कभी शिकायत नहीं की। वह जानती थी कि उसके माता-पिता अपनी पूरी क्षमता से परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। गरीबी थी, लेकिन आत्मसम्मान भी था। शादी और नई उम्मीदें समय बीता और रीना की शादी शहर में नौकरी करने वाले युवक से हो गई। शुरुआत के कुछ महीने ठीक रहे। फिर अचानक पति का कारोबार घाटे में चला गया। आय कम हो गई और घर चलाना कठिन होने लगा। जब हालात बदलने लगे अब रीना को हर छोटी-छोटी ज़रूरत के लिए समझौते करने पड़े। जिस पति के साथ उसने सपनों भरा भविष्य देखा था, वह अब बेचैनी और असहायता में डूबा हुआ नज़र आने लगा। गरीबी का फर्क रीना को महसूस हुआ कि मायके की गरीबी उसके अतीत का हिस्सा थी, लेकिन पति की गरीबी उसके वर्तमान और बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही थी। मायके में गरीबी थी, पर हौसला था। यहाँ हालात के साथ उम्मीद भी टूटती जा रही थी। मन का द्वंद्व धीरे-धीरे रीना के मन में गुस्सा और असमंजस भरने लगा। ...
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